

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट
मौदहा (हमीरपुर)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मौदहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत उरदना में दर्ज ऑनलाइन हाजिरी रिकॉर्ड ने पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनएमएमएस (NMMS) ऐप के माध्यम से अपलोड की गई उपस्थिति में कई संदिग्ध तथ्य सामने आए हैं, जिससे “फर्जी हाजिरी” की आशंका जताई जा रही है।
📌 क्या है मामला?
16 फरवरी 2026 की उपस्थिति रिपोर्ट में कार्यस्थल की एक ग्रुप फोटो अपलोड दिखाई गई है, लेकिन सिस्टम पर साफ उल्लेख है कि “Second Photo is not uploaded”। नियमानुसार एनएमएमएस ऐप में सुबह और दोपहर की दो फोटो अपलोड होना अनिवार्य है। दूसरी फोटो न होना अपने आप में नियमों की अनदेखी दर्शाता है।
📌 फोटो से फोटो खींचकर अपलोड?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर वास्तविक कार्य कम और फोटोबाजी ज्यादा हो रही है। एक ही फोटो को अलग-अलग एंगल से खींचकर या मोबाइल स्क्रीन से दोबारा फोटो लेकर अपलोड करने जैसी आशंकाएं जताई जा रही हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में मजदूर स्थल पर मौजूद थे या सिर्फ कागजों में उपस्थिति दर्ज की गई?
📌 टाइमस्टैम्प और जिम्मेदारी
रिकॉर्ड के अनुसार फोटो 16 फरवरी 2026 को सुबह 10:37 बजे ली गई और दोपहर 1:08 बजे अपलोड की गई। अपलोड करने वाले का नाम ‘सोनी’ (डिज़िग्नेशन: मेट) दर्शाया गया है। यदि दूसरी अनिवार्य फोटो अपलोड नहीं हुई, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
📌 प्रशासन से उठ रहे सवाल
क्या बिना दूसरी फोटो के उपस्थिति मान्य है?
क्या जियो-कोऑर्डिनेट्स की जांच हुई?
क्या उच्चाधिकारियों ने सत्यापन किया?
अगर गड़बड़ी है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
📢 ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित मेट/तकनीकी सहायक की भूमिका की पड़ताल और फर्जी भुगतान की जांच की मांग की है। साथ ही ब्लॉक स्तर पर हो रहे कार्यों का सोशल ऑडिट कराने की भी मांग उठ रही है।
यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की साख पर गंभीर असर पड़ सकता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा।